आधुनिक डिजिटल युग में सूचनाओं का आदान-प्रदान और उन्हें खोजने के तौर-तरीके एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। YouGov की एक हालिया रिपोर्ट, 'हाउ एआई इज़ चेंजिंग ऑनलाइन डिस्कवरी इन 2026', यह रेखांकित करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न केवल भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है, बल्कि उनके सूचना खोजने के बुनियादी ढांचे को भी नया स्वरूप दे रहा है। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग 60% उपयोगकर्ता अब अपने दिन की शुरुआत किसी न किसी एआई असिस्टेंट के माध्यम से ही कर रहे हैं। विशेषकर शहरी क्षेत्रों की बात करें तो यह आंकड़ा और भी प्रभावशाली हो जाता है, जहाँ 89% ऑनलाइन सर्च करने वाले लोग किसी न किसी रूप में एआई आधारित टूल का सहारा ले रहे हैं।

एआई के प्रति बढ़ता यह रुझान यह स्पष्ट करता है कि तकनीक अब केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की एक अपरिहार्य आवश्यकता बनती जा रही है। विशेषकर युवा पीढ़ी, जिसे हम जेन-जी और मिलेनियल्स के रूप में जानते हैं, इस तकनीक को बड़ी तेजी से अपना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 67% जेन-जी और 65% मिलेनियल्स अपनी रोजाना की सर्च के लिए एआई असिस्टेंट पर निर्भर हैं, जबकि अधिक उम्र के वर्ग में यह भागीदारी फिलहाल 30% के आसपास है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि एआई सर्च इंजन को पूरी तरह विस्थापित नहीं कर रहा है, बल्कि उसे एक अधिक परिष्कृत और त्वरित विकल्प प्रदान कर रहा है।

वर्तमान में भारतीय उपयोगकर्ता एआई का उपयोग बहुआयामी तरीके से कर रहे हैं। लगभग 49% उपयोगकर्ता सीधे और सटीक उत्तर प्राप्त करने के लिए एआई पर भरोसा जता रहे हैं, जबकि अन्य उपयोगकर्ता इसे जानकारी को संक्षेप में तैयार करने या विभिन्न विकल्पों की तुलना करने के लिए अपना रहे हैं। रोचक तथ्य यह है कि एआई से मिले परिणामों के बाद भी, एक बड़ा वर्ग अभी भी अन्य विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी को क्रॉस-वेरिफाई करने को प्राथमिकता देता है, जो डिजिटल साक्षरता और सूचना के प्रति बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।

एआई असिस्टेंट्स का यह उदय सूचनाओं को खोजने के पारंपरिक 'सर्च बॉक्स' अनुभव को पीछे छोड़ रहा है। एआई सीधे जवाब देने की क्षमता रखता है, जिससे यूजर को वेबसाइटों के जाल में उलझने की आवश्यकता कम हो रही है। हालांकि, भारतीय उपयोगकर्ताओं के बीच एआई पर भरोसे को लेकर अभी भी थोड़ा संशय है। लगभग 69% उपयोगकर्ता एआई पर भरोसा करते हैं, लेकिन सर्च इंजन और मैप्स के मुकाबले यह भरोसा अभी भी कुछ कम है। भविष्य में इस तकनीक की स्वीकार्यता तब और बढ़ेगी जब जवाबों के पीछे आधिकारिक स्रोतों का उल्लेख और उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। यह परिवर्तन न केवल एक तकनीकी विकास है, बल्कि डिजिटल युग में ज्ञान प्राप्ति के साधनों का एक नया अध्याय है, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में और अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story