भारत में 100% एथेनॉल (E100) ईंधन को मिली कानूनी मंजूरी ; जानिए क्या अब कम होगा कच्चे तेल का आयात?
भारत सरकार ने 100% एथेनॉल (E100) ईंधन को कानूनी मान्यता देते हुए E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के संचालन का रास्ता साफ कर दिया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की इस घोषणा से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने, प्रदूषण घटाने, बायोफ्यूल उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी
भारत ने स्वच्छ परिवहन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए 100 प्रतिशत एथेनॉल (E100) ईंधन के कानूनी उपयोग का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार ने वाहनों में 100% एथेनॉल ईंधन के उपयोग के लिए नियामक ढांचे को मंजूरी दे दी है। यह घोषणा नागपुर में आयोजित शुगर, एथेनॉल एंड बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। इस अवसर पर गडकरी ने बताया कि उन्होंने 13 जून 2026 को संबंधित नियमों पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद E100 को भारत में आधिकारिक रूप से एक मान्यता प्राप्त ऑटोमोटिव ईंधन का दर्जा मिल गया है।
हालांकि सरकार ने देशभर में E100 ईंधन के उपयोग को अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन इस फैसले के तहत 100 प्रतिशत एथेनॉल को परिवहन ईंधन के रूप में कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गई है। इसके साथ ही ऐसे वाहनों, जिन्हें विशेष रूप से E100 या फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप विकसित किया गया है, उन्हें भारत की सड़कों पर पंजीकृत करने और चलाने की अनुमति देने वाले नियमों को भी मंजूरी मिल गई है। इस निर्णय के बाद वाहन निर्माता कंपनियों के लिए पूरी तरह एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने का रास्ता साफ हो गया है।
यह फैसला भारत की ऊर्जा नीति के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। नितिन गडकरी के अनुसार, भारत हर वर्ष जीवाश्म ईंधन के आयात पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। उनका मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन के व्यापक उपयोग से इस भारी आयात व्यय में कमी लाई जा सकती है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी।
पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी E100 ईंधन को एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। एथेनॉल कृषि आधारित फसलों से तैयार होने वाला एक नवीकरणीय जैव ईंधन है, जो पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ दहन करता है। इसके उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी, वायु में सूक्ष्म कणों के प्रदूषण को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं तथा नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस फैसले का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलने की संभावना है। एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न तथा कृषि बायोमास जैसी फसलों और संसाधनों की मांग में वृद्धि होगी। इससे किसानों की आय बढ़ने, ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने और देश के बायोफ्यूल सेक्टर के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि E100 ईंधन का उपयोग सभी मौजूदा पेट्रोल वाहनों में नहीं किया जा सकेगा। केवल वे वाहन जो विशेष रूप से 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने के लिए विकसित किए गए हैं, या फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) तकनीक से लैस हैं, वही इस ईंधन का सुरक्षित उपयोग कर सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य पेट्रोल वाहनों में सीधे E100 भरने से इंजन और फ्यूल सिस्टम के उन हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है, जिन्हें उच्च एथेनॉल सांद्रता के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है।
नितिन गडकरी ने यह भी जानकारी दी कि कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां पहले से ही एथेनॉल आधारित वाहनों के विकास पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी ने 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली वैगनआर का प्रदर्शन किया है, जिसका अनावरण नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संयुक्त रूप से किया। इसके अलावा टोयोटा, सुजुकी, हुंडई मोटर कंपनी और हीरो मोटोकॉर्प भी फ्लेक्स-फ्यूल और E100 अनुकूल वाहनों के विकास में जुटी हुई हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों के नए मॉडल भारतीय बाजार में लॉन्च किए जाने की संभावना है।
भारत में फिलहाल E20 पेट्रोल का उपयोग शुरू हो चुका है, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। वहीं E10 में 10 प्रतिशत, E85 में 85 प्रतिशत और E100 में पूरी तरह 100 प्रतिशत एथेनॉल का उपयोग किया जाता है। नई मंजूरी E20 से कहीं आगे बढ़ते हुए ऐसे वाहनों के संचालन की अनुमति देती है जो पूरी तरह एथेनॉल पर आधारित होंगे।
E100 ईंधन को कानूनी मान्यता मिलने से देश का ईंधन आयात बिल कम करने, प्रदूषण घटाने, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने, कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाने, बायोफ्यूल उद्योग में निवेश को प्रोत्साहन देने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तकनीक के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में परिवहन क्षेत्र और जैव ईंधन उद्योग दोनों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
