मानसून सत्र 2026: संसद में पेश होंगे 7 बड़े बिल, 'वंदे मातरम्' से सुप्रीम कोर्ट तक अहम बदलावों की तैयारी|
सरकार ने मानसून सत्र के लिए सात प्रमुख विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। इसमें राष्ट्र गौरव अपमान निवारण और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल शामिल हैं।

संसद भवन में लोकसभा की बैठक, जहां केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान कई विधायी कार्यों और विधेयकों पर चर्चा करेगी।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। इस सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के लिए सात प्रमुख विधेयकों को विचार और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इन विधेयकों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना और शासन के विभिन्न पहलुओं को आधुनिक स्वरूप प्रदान करना है।
सूचीबद्ध विधेयकों में 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करने का प्रावधान करता है। इसके माध्यम से सरकार राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का लक्ष्य रख रही है। इसी के साथ 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' भी पेश किया जाएगा। इस बिल के तहत दो साल के विलंब से होने वाले जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी, जो मौजूदा प्रावधानों को अधिक सख्त बनाएगा।
सरकार 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (एफसीआरए) को भी पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी। बजट सत्र के दौरान यह विधेयक पेश किया गया था, किंतु तब इस पर विचार नहीं हो सका था। इसके अतिरिक्त, 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक' के माध्यम से न्यायालय में जजों की संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने संबंधी अध्यादेश पर संसद की स्वीकृति ली जाएगी। वहीं, 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक, 2025' के अंतर्गत यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई को एकीकृत कर एक नियामक आयोग बनाने का प्रस्ताव है।
आर्थिक सुधारों के संदर्भ में 'आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026' को सूचीबद्ध किया गया है, जो विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त ब्याज पर कर छूट देने वाले अध्यादेश का स्थान लेगा। साथ ही, 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' एमएसएमई इकोसिस्टम में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और भुगतान की समस्याओं को हल करने हेतु पेश किया जाएगा। हालांकि, महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित बिलों का उल्लेख वर्तमान सूची में नहीं है, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार सत्र की अवधि के दौरान इन पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यह सत्र देश की विधायी प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा को निर्धारित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

Lalita Rajput
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