क्या केंद्र में शिक्षा मंत्री बनेंगे देवेंद्र फडणवीस? संजय राउत के नए दावे से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई|
संजय राउत ने दावा किया है कि देवेंद्र फडणवीस अगले केंद्रीय शिक्षा मंत्री बन सकते हैं, जबकि सीएम खुद इसका खंडन कर चुके हैं।

शिवसेना सांसद संजय राउत (बाएं) और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (दाएं) मुंबई में एक राजनीतिक चर्चा के संदर्भ में।
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बयानों का दौर तेज हो गया है और इस बार केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल और मंत्रियों के विभागों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खाली हुए पद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रह्लाद जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद, राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों पर कयासों का बाजार गर्म है। इसी बीच, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बार फिर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। राउत का कहना है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही देश के अगले केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनेंगे।
संजय राउत ने सोमवार को मीडिया के सामने पूरे आत्मविश्वास के साथ दोहराया कि भले ही देवेंद्र फडणवीस इस बात से लगातार इनकार कर रहे हों, लेकिन वे जल्द ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभालने के लिए दिल्ली रवाना होंगे। राउत ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह फैसला पूरी तरह से फडणवीस के निजी नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए उदाहरण दिया कि साल 2022 में महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करना भी फडणवीस की अपनी व्यक्तिगत इच्छा नहीं थी। जब उनके पद को लेकर फैसले हुए, तो सीधे केंद्रीय नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से निर्देश आए थे, जिन्हें उन्हें मानना पड़ा था।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर जब राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों से बात की गई, तो इसके पीछे की गहरी राजनीतिक रणनीति सामने आई। राजनीतिक मामलों के जानकार हरिगोविंद विश्वकर्मा का मानना है कि उद्धव सेना का यह रुख किसी प्रकार का प्रेम या प्रशंसा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा राजनीतिक इतिहास जुड़ा है। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में अविभाजित शिवसेना एक बड़ी ताकत हुआ करती थी और बीजेपी अपेक्षाकृत छोटी भूमिका में थी। लेकिन 2014 के बाद देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी ने जिस आक्रामक तरीके से राजनीतिक विस्तार किया, उससे शिवसेना का कद धीरे-धीरे छोटा होता चला गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2019 में दोनों दलों के अलग होने और उसके बाद जिस प्रकार से देवेंद्र फडणवीस ने राजनीतिक चालें चलकर उद्धव सेना को कमजोर किया और पार्टी में विभाजन की पटकथा लिखी, उसे ठाकरे गुट आज भी भूला नहीं है। आज उद्धव ठाकरे से लेकर पार्टी का आम कार्यकर्ता तक अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर देवेंद्र फडणवीस को ही जिम्मेदार मानता है। यही वजह है कि उद्धव और संजय राउत लगातार यह दावा कर रहे हैं कि फडणवीस को दिल्ली की राजनीति में शिफ्ट कर दिया जाना चाहिए, ताकि महाराष्ट्र में उनके लिए खाली जगह और नया राजनीतिक स्पेस बन सके।
संजय राउत द्वारा बार-बार फडणवीस के दिल्ली जाने की बात को उछालने के पीछे राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि इसके जरिए सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर विशेषकर एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर नए समीकरण और अंदरूनी खींचतान को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, यह भी एक सच्चाई है कि वर्तमान में देवेंद्र फडणवीस शरद पवार के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन तमाम अटकलों और दावों का पहले ही स्पष्ट रूप से खंडन कर चुके हैं। इसके बावजूद, संजय राउत अपनी बात के समर्थन में 1991 का ऐतिहासिक उदाहरण देते नजर आए। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने देश के आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी गैर-राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन सिंह को सौंपी थी। राउत का यह भी तर्क रहा कि आदर्श रूप में शिक्षा मंत्रालय नंदन नीलेकणि जैसे किसी पेशेवर और सक्षम व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, लेकिन यदि केंद्र सरकार देवेंद्र फडणवीस के बारे में विचार कर रही है, तो वे भी एक विकल्प हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि यदि भविष्य में देवेंद्र फडणवीस राज्य की राजनीति छोड़कर केंद्र की ओर रुख करते हैं, तो महाराष्ट्र में बीजेपी का नेतृत्व कमजोर पड़ सकता है और पार्टी को एक वैकल्पिक कमान तैयार करनी होगी। ऐसी स्थिति में उद्धव ठाकरे गुट को अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से मजबूत करने और पुनर्स्थापित होने का एक सुनहरा मौका मिल सकता है। महायुति के भीतर चल रही इन राजनीतिक चर्चाओं और बयानों के बीच यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रिमंडल और महाराष्ट्र की आंतरिक राजनीति में क्या नए मोड़ आते हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
