कामाख्या मंदिर अंबुबाची मेले में शर्मसार हुई आस्था; दम घुटती भीड़ के बीच फंसे जोड़े से बदसलूकी
गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर आयोजित वार्षिक उत्सव के दौरान अत्यधिक भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों के बीच एक महिला पर पानी की बोतल फेंकने की घटना सामने आई।

असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित माँ कामाख्या देवी मंदिर परिसर में वार्षिक अंबुबाची मेले के अनुष्ठानों में भाग लेने पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
Kamakhya Temple Ambubachi Mela crowd incident : आस्था, शक्ति साधना और पवित्रता के प्रतीक असम के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक कामाख्या शक्तिपीठ में चल रहे वार्षिक अंबुबाची मेले से एक बेहद विचलित करने वाली और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। माँ कामाख्या के दरबार में जहाँ देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु शीश नवा रहे हैं, वहीं भीड़ के बीच फंसे एक लाचार जोड़े के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की घटना ने उत्सव की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित इस पावन धाम में उमड़े जनसैलाब के बीच से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दम घुटने वाली भीड़ से सुरक्षित बाहर निकलने की जद्दोजहद कर रहे एक जोड़े को सुरक्षा या सहानुभूति मिलने के बजाय वहां मौजूद लोगों के आक्रोश और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। यह घटना उस पावन प्रांगण में घटी है जो स्त्री शक्ति और दैवीय मातृत्व के सम्मान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना बीते 25 जून की बताई जा रही है, जब कामाख्या मंदिर परिसर में अंबुबाची मेले के मुख्य अनुष्ठानों के चलते श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बदहवास और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा जोड़ा अत्यधिक भीड़ के कारण उत्पन्न हुए दम घोंटू माहौल से किसी तरह बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा था। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी लाचारी को समझने के बजाय उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब इस आक्रामक भीड़ के बीच से किसी ने उस पीड़ित महिला के ऊपर पानी की बोतल दे मारी, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। पवित्र धार्मिक स्थल पर असहाय अवस्था में घिरे इस जोड़े की चीखें और मदद की गुहार वहां मौजूद सैकड़ों मूकदर्शकों के शोर में दबकर रह गईं।
ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो कामाख्या मंदिर का यह वार्षिक मेला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जून के इस महीने में आयोजित होने वाला यह पर्व विशेष रूप से माँ कामाख्या की दिव्य स्त्री शक्ति और उनके रजस्वला चक्र (मासिक धर्म) के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जहाँ पूरी दुनिया से तांत्रिक, अघोरी और गृहस्थ साधक आशीर्वाद लेने आते हैं। इस वर्ष भी अब तक लगभग 8 लाख से अधिक श्रद्धालु इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बनने के लिए गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। लेकिन इस पावन पृष्ठभूमि के विपरीत, मंदिर परिसर से आई इस हिंसक और असंवेदनशील घटना ने प्रशासन के व्यापक दावों और वहां मौजूद भीड़ के सामाजिक विवेक की पोल खोलकर रख दी है। मेले की भव्यता और लाखों लोगों की सुरक्षा को लेकर किए गए बड़े-बड़े इंतजाम इस एक घटना के सामने बौने साबित होते दिखे, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
इस पूरे मामले के कानूनी और आधिकारिक पहलुओं की बात करें तो घटना के कई घंटे बीत जाने और वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। असम पुलिस और मंदिर प्रबंधन समिति ने इस घटना पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, जिससे स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स में भारी नाराजगी है। हालांकि, प्रारंभिक जानकारियों के अनुसार इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भीड़ द्वारा एक महिला को सरेआम निशाना बनाए जाने के बावजूद कानून व्यवस्था का इस तरह मौन रहना प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है। वीडियो देखने वाले लाखों लोग इस समय दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह हमारे सामूहिक सामाजिक पतन और धार्मिक स्थलों पर बढ़ती असंवेदनशीलता का एक गंभीर प्रमाण है। जिस शक्तिपीठ की चौखट पर लोग नारी शक्ति की पूजा करने और आत्मिक शांति की तलाश में आते हैं, उसी प्रांगण में एक महिला और पुरुष का इस तरह प्रताड़ित होना बेहद चिंताजनक है। अंबुबाची मेले के पावन अनुष्ठान और उत्सव अभी भी जारी हैं, लेकिन इस बीच इस घटना ने देश के तमाम बड़े धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा घेरे और सबसे महत्वपूर्ण रूप से श्रद्धालुओं के भीतर 'सहानुभूति' और 'धैर्य' की भावना को जागृत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। यदि समय रहते इन पवित्र स्थलों पर मानवीय मूल्यों की रक्षा के कड़े उपाय नहीं किए गए, तो आस्था के ये महापर्व केवल भीड़ के अनियंत्रित और हिंसक केंद्रों में तब्दील होकर रह जाएंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
