अमेरिकी अभियोजकों ने भारतीय पुलिस अधिकारी पर लॉस एंजिल्स के परिवार से 4 लाख डॉलर की वसूली का लगाया आरोप
लॉस एंजिल्स के परिवार से 4 लाख डॉलर की वसूली करने के आरोपी भारतीय पुलिस अधिकारी गुरिंदरजीत सिंह के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। क्या अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों का जाल प्रवासी परिवारों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले रहा है?

तस्वीर में एक अमेरिकी अधिकारी मीडिया को संबोधित कर रहे हैं, जबकि उनके पीछे संघीय जांच ब्यूरो (FBI) का प्रतीक चिन्ह लगा हुआ है।
लॉस एंजिल्स के एक परिवार को फर्जी हत्या के मामले में फंसाने की धमकी देकर 4 लाख डॉलर (करीब 2 लाख 94 हजार पाउंड) की वसूली करने के मामले में अमेरिकी अभियोजकों ने एक भारतीय पुलिस अधिकारी को आरोपी बनाया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़े अभियान का हिस्सा है। आरोपी अधिकारी की पहचान गुरिंदरजीत सिंह के रूप में हुई है। हालांकि अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने भारत से उसके प्रत्यर्पण की मांग करने की योजना बनाई है। यह मामला 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' का हिस्सा है, जो उत्तरी अमेरिका और यूरोप में सक्रिय भारत-आधारित आपराधिक सिंडिकेट को निशाना बनाने वाला एक बहुराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन अभियान है।
अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा जारी अभियोग के अनुसार, गुरिंदरजीत सिंह पर आरोप है कि उसने 'जग्गू भगवानपुरिया' संगठित अपराध समूह के सदस्यों के साथ मिलकर इस वसूली को अंजाम दिया। जांच में यह सामने आया कि कैलिफोर्निया स्थित एक गिरोह के सदस्य ने पहले पीड़ित को धमकी दी और फिर उसकी व्यक्तिगत जानकारी सिंह को भेज दी। आरोप है कि सिंह ने पंजाब पुलिस में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पीड़ित, उसके पिता और बहन को जनवरी में हुई एक हत्या के मामले में फर्जी तौर पर फंसाने की कार्रवाई की।
मामले की जानकारी देते हुए फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एसेली ने बताया कि आरोपी अधिकारी ने झूठा केस वापस लेने के बदले में 4 लाख डॉलर की मांग की थी। जब परिवार ने शुरुआत में पैसे देने से इनकार किया, तो अधिकारी ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह खुलासा नहीं किया है कि क्या यह भुगतान किया गया था। यह आरोप अभी साबित होने बाकी हैं और इनकी जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
संघीय अभियोजकों का कहना है कि यह मामला दर्शाता है कि कैसे संगठित अपराध अब नशीली दवाओं की तस्करी और हिंसा से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवारों को निशाना बना रहे हैं। गिरोह अब विदेशों में रह रहे लोगों को उनके मूल देश में रहने वाले रिश्तेदारों को कानूनी या शारीरिक धमकी देकर नियंत्रित कर रहे हैं। भारतीय प्रवासियों के लिए यह मामला एक चेतावनी है कि भौगोलिक दूरी उन्हें आपराधिक धमकियों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखती है।
'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत अमेरिका, कनाडा और स्पेन में 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और भारत-आधारित तीन संगठित समूहों से जुड़े 37 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। इस अभियान में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ जैसे गिरोह के नेताओं के नाम भी शामिल हैं, जिन पर हत्या, नशीली दवाओं की तस्करी और जबरन वसूली के आरोप हैं। इस जांच के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में कोकीन, हेरोइन, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। गुरिंदरजीत सिंह के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक और कानूनी समन्वय पर निर्भर करेगी, जिसमें समय लग सकता है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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