ज्ञानवापी विवाद में नहीं बनी आम सहमति,अब अदालत का फैसला ही करेगा अंतिम निर्णय|
वाराणसी कोर्ट में मध्यस्थता के प्रयास असफल, दोनों पक्षों ने न्यायिक निर्णय पर जताई सहमति।

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का बाहरी दृश्य, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच कानूनी विवाद चल रहा है।
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद को सुलझाने की दिशा में की गई हालिया पहल मंगलवार को अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। वाराणसी कोर्ट परिसर स्थित मेडिएशन सेंटर में तीन सदस्यीय न्यायिक समिति के समक्ष आयोजित बैठक में हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में आपसी बातचीत या मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालना संभव नहीं है। दोनों पक्षों की ओर से यह निर्णय लिया गया कि अब इस संवेदनशील प्रकरण का हल केवल अदालत के माध्यम से ही निकाला जाएगा और वे अंतिम न्यायिक निर्णय को ही स्वीकार करेंगे।
बैठक में मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के अधिवक्ता एखलाक अहमद, रईस अहमद और मुमताज अहमद के साथ सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता मो. तौहीद खान शामिल हुए। उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि ज्ञानवापी का मामला टाइटल सूट और संवैधानिक अधिकारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। अधिवक्ता मंडल का तर्क है कि ऐसे जटिल मुद्दों का समाधान केवल स्थापित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है, न कि किसी अनौपचारिक वार्ता से।
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने भी मध्यस्थता की प्रक्रिया को खारिज करते हुए न्यायिक निर्णय की मांग की है। श्रृंगार गौरी मामले के अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित विभिन्न याचिकाओं का हवाला देते हुए वर्तमान मध्यस्थता प्रक्रिया की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू पक्ष शुरू से ही अदालत के माध्यम से इस विवाद का पूर्ण निपटारा चाहता है। जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) सुलभ प्रकाश ने जानकारी दी है कि मेडिएशन सेंटर में हुई इस बैठक की विस्तृत रिपोर्ट अब सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी, जहां से आगे की दिशा तय होगी।
इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने देश के एक अन्य संवेदनशील मामले, मध्य प्रदेश के भोजशाला विवाद पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील है और इसमें दोनों पक्षों को धैर्य और संयम बनाए रखने की आवश्यकता है। अदालत ने इस मामले पर प्रतिदिन सुनवाई करने और एक स्थाई समाधान तक पहुंचने की प्रतिबद्धता दोहराई है। अंतरिम व्यवस्था के तौर पर, कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित स्थल के निकट खुली जगह उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किया था।
ज्ञानवापी और भोजशाला जैसे मामले देश की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परीक्षण हैं। न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इन विवादों का समाधान न केवल कानूनी औपचारिकता है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मिसाल भी स्थापित करेगा। फिलहाल, देश भर की निगाहें अदालती कार्रवाइयों पर टिकी हैं, क्योंकि ज्ञानवापी का भविष्य अब पूरी तरह से न्यायपालिका के अंतिम फैसले पर निर्भर हो गया है।

Lalita Rajput
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