दिल्ली में शुरू होगी भारत की पहली एयर ट्रेन ; इंटर-टर्मिनल सफर होगा मिनटों का, जानिए पूरा प्लान
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर 7.7 किलोमीटर लंबी देश की पहली ड्राइवरलेस एयर ट्रेन (APM) परियोजना की योजना तैयार की गई है, जो टर्मिनल 1, 2/3, एरोसिटी और कार्गो सिटी को जोड़ेगी। यह आधुनिक सिस्टम तेज, सुगम और स्वचालित इंटर-टर्मिनल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे यात्रियों का समय और भीड़ दोनों में कमी आएगी।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का आंतरिक भाग
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर देश की पहली पूरी तरह से स्वचालित और ड्राइवरलेस एयर ट्रेन प्रणाली विकसित करने की योजना सामने आई है, जिसे ऑटोमेटेड पीपल मूवर (APM) के रूप में जाना जाएगा। यह अत्याधुनिक परियोजना एयरपोर्ट परिसर के भीतर तेज, सुगम और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है, जिससे यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
यह प्रस्तावित एयर ट्रेन लगभग 7.7 किलोमीटर लंबे समर्पित कॉरिडोर पर संचालित होगी, जो टर्मिनल 1, टर्मिनल 2 और टर्मिनल 3, एरोसिटी तथा कार्गो सिटी को आपस में जोड़ेगी। इस प्रणाली के तहत कुल चार प्रमुख स्टेशन बनाए जाने की योजना है, जिनमें टर्मिनल 1, टर्मिनल 2/3, एरोसिटी और कार्गो सिटी शामिल होंगे। यह पूरी व्यवस्था एयरपोर्ट के भीतर एक आधुनिक ट्रांजिट नेटवर्क की तरह काम करेगी।
इंजीनियरिंग और डिजाइन के स्तर पर यह परियोजना मिश्रित संरचना पर आधारित होगी, जिसमें लगभग 5.7 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचा) होगा, जबकि शेष हिस्सा ग्राउंड लेवल पर विकसित किया जाएगा। इस पूरी प्रणाली को पूरी तरह ड्राइवरलेस तकनीक पर संचालित किया जाएगा, जिससे संचालन मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वचालित रूप से संभव होगा। इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जैसा कि सिंगापुर और दुबई जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में देखा जाता है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य टर्मिनल 1 और टर्मिनल 2/3 के बीच की दूरी को प्रभावी रूप से कम करना और यात्रियों के लिए इंटर-टर्मिनल ट्रांसफर को तेज और सुविधाजनक बनाना है। वर्तमान में यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक जाने के लिए शटल बसों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें ट्रैफिक और दूरी के कारण अधिक समय लगता है। प्रस्तावित एयर ट्रेन के शुरू होने के बाद यह यात्रा कुछ ही मिनटों में पूरी हो सकेगी, जिससे एयरपोर्ट पर भीड़ और समय दोनों की बचत होगी।
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3000 से 4000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसका वित्तपोषण दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) द्वारा किया जाएगा और इसे डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल के तहत विकसित किए जाने की संभावना है। परियोजना के निर्माण के लिए लगभग 30 महीनों की अवधि का अनुमान लगाया गया है, और इसे वर्ष 2027 के अंत से 2029 के बीच पूरा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस एयर ट्रेन प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे एयरपोर्ट के भीतर ही इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि टर्मिनल प्रवेश बिंदुओं तक पहुंच न्यूनतम पैदल दूरी में संभव हो सके। साथ ही, इसे एक आधुनिक एविएशन हब मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट की वैश्विक कनेक्टिविटी और ट्रांजिट क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा बन जाएगा, जहां पूरी तरह ड्राइवरलेस इंटर-टर्मिनल रेल सिस्टम संचालित होगा। यह न केवल यात्रियों के अनुभव को अधिक सुगम बनाएगा, बल्कि भारत के विमानन बुनियादी ढांचे को भी वैश्विक मानकों के और करीब ले जाएगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
