अफीम किसानों का चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट घेराव, डोडा चूरा नीति समेत मांगों पर उग्र प्रदर्शन
चित्तौड़गढ़ में अफीम किसानों ने कलेक्ट्रेट घेरकर डोडा चूरा नीति और धारा 8/29 समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

तस्वीर में चित्तौड़गढ़ के कलेक्ट्रेट चौराहे पर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए और सड़क पर बैठे हुए सैकड़ों अफीम किसान दिखाई दे रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ में सोमवार को विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जिले भर के अफीम किसानों का बड़ा आंदोलन देखने को मिला। सैकड़ों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और कलेक्ट्रेट का घेराव कर जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रदर्शन की शुरुआत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे अफीम किसानों के कॉलेज ग्राउंड में एकत्र होने से हुई। यहां से किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में विशाल पैदल मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर किसान नारेबाजी करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट चौराहे पहुंचे।
कलेक्ट्रेट चौराहे पर पहुंचने के बाद किसानों ने वहां पड़ाव डाल दिया और कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों के आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। कलेक्ट्रेट चौराहे और आसपास के मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। आमजन को परेशानी से बचाने के लिए पुलिस प्रशासन को शहर के मुख्य मार्गों के यातायात रूट में बदलाव करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। किसानों ने मुख्य रूप से मांग की कि डोडा चूरा को कठोर एनडीपीएस एक्ट से हटाकर आबकारी अधिनियम के तहत शामिल किया जाए। इसके साथ ही आबकारी व अफीम नीति के तहत पिछले 8 वर्षों के डोडा चूरा नष्टीकरण की मांग का किसानों ने विरोध करते हुए इसे व्यावहारिक रूप से अनुचित बताया।
किसानों ने यह भी मांग रखी कि किसानों पर दर्ज होने वाले मामलों में धारा 8/29 के दुरुपयोग को रोका जाए और इसे पूरी तरह समाप्त किया जाए, ताकि निर्दोष किसानों को झूठे मुकदमों और कानूनी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़े।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ब्रदीलाल जाट ने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाता है, लेकिन कड़े कानूनों और प्रशासनिक नीतियों के कारण उसे अपराधियों की तरह देखा जाता है। उन्होंने कहा कि यदि डोडा चूरा को एनडीपीएस एक्ट से नहीं हटाया गया और धारा 8/29 समाप्त नहीं की गई तो यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश स्तर पर और अधिक भयावह रूप लेगा।
अफीम किसानों के इस प्रदर्शन ने जिले में किसानों की लंबित मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के सामने एक बार फिर मुद्दा प्रमुखता से रखा है। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगों के समाधान को लेकर वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

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